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सीएफडी क्या है?

सीएफडी क्या है?

सीएफडी क्या है? (परिभाषा)

सीएफडी यानी कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस एक ऐसा वित्तीय समझौता है जिसमें आप किसी एसेट को असल में खरीदे या बेचे बिना सिर्फ उसकी कीमत के अंतर पर सौदा करते हैं। आसान शब्दों में: सीएफडी आपके और प्रोवाइडर के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके तहत एसेट की कीमत का अंतर सौदा खुलने और बंद होने के बीच जितनी ऊपर-नीचे जाएगी, उतना फर्क आपस में चुकता कर दिया जाएगा।

यहाँ सबसे जरूरी बात यह समझना है कि सीएफडी में आपको उस शेयर, करेंसी या कमोडिटी का मालिकाना हक नहीं मिलता। बहुत से शुरुआती लोग यहीं गलती कर बैठते हैं, वे सोचते हैं कि सीएफडी लेने का मतलब असल में शेयर खरीदना है। ऐसा नहीं है। आपके हाथ में सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जो किसी एसेट की कीमत को ट्रैक करता है। कीमत बढ़ी या घटी, बस उसी अंतर का हिसाब होता है।

कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस को एक तरह का डेरिवेटिव माना जाता है, क्योंकि इसकी अपनी कोई अलग कीमत नहीं होती। इसकी पूरी वैल्यू उस एसेट पर टिकी रहती है जिसे यह ट्रैक कर रहा होता है।

सीएफडी कैसे काम करता है?

सीएफडी का पूरा मैकेनिज्म एक सीधे-से विचार पर टिका है, और वह है कीमत का अंतर। जब आप कोई सीएफडी पोजीशन खोलते हैं, तो उस पल की कीमत नोट हो जाती है। जब आप उसे बंद करते हैं, तो ओपनिंग प्राइस की तुलना क्लोजिंग प्राइस से की जाती है। इन दोनों कीमतों के बीच जो फर्क निकलता है, वही आपका फायदा या नुकसान बन जाता है स्प्रेड, किसी भी कमीशन और फाइनेंसिंग शुल्क के लागू होने से पहले।

जिस एसेट की कीमत पर यह पूरा हिसाब चलता है, उसे अंडरलाइंग एसेट कहते हैं। यह कोई शेयर हो सकता है, कोई करेंसी पेयर, कोई इंडेक्स या सोने जैसी कमोडिटी। सीएफडी की कीमत खुद-ब-खुद इसी अंडरलाइंग एसेट के हिसाब से ऊपर-नीचे होती रहती है।

एक आसान काल्पनिक उदाहरण से समझते हैं, और ध्यान रहे कि यह सिर्फ समझाने के लिए है, कोई सलाह नहीं। मान लीजिए किसी एसेट की कीमत अभी 100 रुपये है और आप इस उम्मीद पर एक पोजीशन खोलते हैं कि कीमत बढ़ेगी। कुछ समय बाद कीमत 110 रुपये हो जाती है और आप पोजीशन बंद कर देते हैं। यहाँ 10 रुपये का जो अंतर है, वही आपका नतीजा है। अब अगर कीमत उलटी दिशा में जाकर 90 रुपये पर आ जाती, तो यही 10 रुपये का अंतर आपके नुकसान में बदल जाता। यानी अंतर हमेशा दोनों तरफ काम करता है।

सीएफडी में मालिकाना हक क्यों नहीं होता?

जैसा हमने ऊपर कहा, सीएफडी एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है। इसका सीधा मतलब यह है कि सीएफडी में मालिकाना हक किसी को नहीं मिलता। आप जिस शेयर, करेंसी या कमोडिटी की कीमत पर सौदा कर रहे हैं, वह चीज़ असल में कभी आपके नाम पर नहीं आती।

इस बात के कुछ ठोस असर होते हैं जिन्हें समझना जरूरी है। चूँकि शेयर आपका है ही नहीं, इसलिए कंपनी की तरफ से मिलने वाला डिविडेंड सीधे उसी रूप में आपको नहीं मिलता जैसे एक असली शेयरधारक को मिलता है। किसी चीज़ की फिजिकल डिलीवरी भी नहीं होती, यानी सोने का सीएफडी लेने पर आपके घर सोना नहीं आता। और चूँकि असल एसेट कहीं है ही नहीं, इसलिए उसे स्टोर या संभालकर रखने का सवाल भी खत्म हो जाता है। पूरा सौदा सिर्फ कीमत के अंतर और उसके सेटलमेंट तक सीमित रहता है।

सीएफडी में लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का क्या मतलब है?

सीएफडी की एक खास बनावट यह है कि इसमें आप दो तरह से पोजीशन ले सकते हैं, लॉन्ग और शॉर्ट। लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन को समझना सीएफडी को समझने का एक अहम हिस्सा है।

लॉन्ग पोजीशन का मतलब है खरीदने की तरफ जाना। इसमें आपका हिसाब तब सही बैठता है जब एसेट की कीमत बढ़ती है। इसके उलट, शॉर्ट पोजीशन का मतलब है बेचने की तरफ जाना, जहाँ कीमत गिरने पर आपका पलड़ा भारी होता है। आम शेयर बाजार में अक्सर लोग सिर्फ कीमत बढ़ने पर ही कमाई की सोचते हैं, लेकिन सीएफडी की बनावट ऐसी है कि इसमें कीमत नीचे जाने पर भी पोजीशन ली जा सकती है।

यहाँ यह साफ कर देना जरूरी है कि यह सिर्फ सीएफडी की एक संरचनात्मक खूबी है, यानी यह बताने का तरीका है कि कॉन्ट्रैक्ट कैसे बनता है। कब लॉन्ग जाना चाहिए और कब शॉर्ट, यह इस लेख का विषय नहीं है और न ही यह कोई सलाह है।

सीएफडी में लीवरेज और मार्जिन की भूमिका

सीएफडी की बात हो और लीवरेज तथा मार्जिन का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। इन्हें सिर्फ एक तथ्य के तौर पर समझिए, किसी फायदे के तौर पर नहीं।

मार्जिन वह रकम है जो पोजीशन खोलने के लिए जमा करनी होती है। लीवरेज इसी से जुड़ी बात है। इसकी मदद से कोई व्यक्ति पोजीशन के मूल्य का एक अंश पर एक बड़ी पोजीशन खोल सकता है, यानी पूरी रकम लगाए बिना बड़े आकार का सौदा संभव हो जाता है।

लेकिन यहाँ एक बहुत जरूरी बात है जिसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीएफडी में लीवरेज और मार्जिन जितनी तेजी से संभावित मुनाफे को बढ़ाते हैं, उतनी ही तेजी से संभावित नुकसान को भी बढ़ा देते हैं। यह दोनों तरफ बराबर काम करता है। छोटी जमा राशि पर बड़ी पोजीशन का मतलब यह भी है कि कीमत अगर थोड़ी सी उलटी दिशा में गई, तो नुकसान भी उसी अनुपात में बड़ा हो सकता है। इसीलिए लीवरेज को कोई सुविधा या मौका मानकर नहीं, बल्कि एक ऐसे मैकेनिज्म के तौर पर देखना चाहिए जो जोखिम को कई गुना कर देता है।

सीएफडी और शेयर या स्टॉक में क्या अंतर है?

बहुत से लोग सीएफडी और असली शेयर को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों काफी अलग हैं। सीएफडी और शेयर में अंतर को कुछ आसान बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • मालिकाना हक: शेयर खरीदने पर आप उस कंपनी के आंशिक मालिक बन जाते हैं। सीएफडी में ऐसा कुछ नहीं होता, आपके पास सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट होता है।
  • डिविडेंड और अधिकार: असली शेयरधारक को डिविडेंड और वोटिंग जैसे अधिकार मिल सकते हैं। सीएफडी रखने वाले को उसी रूप में ये चीज़ें नहीं मिलतीं।
  • फायदा-नुकसान का हिसाब: शेयर में मुनाफा तब बनता है जब आप उसे ज्यादा कीमत पर बेचते हैं। सीएफडी में हिसाब सिर्फ खुलने और बंद होने की कीमत के अंतर से होता है।
  • दिशा: आम तौर पर शेयर में लोग कीमत बढ़ने पर कमाई सोचते हैं, जबकि सीएफडी में लॉन्ग और शॉर्ट, दोनों तरह की पोजीशन का ढाँचा मौजूद होता है।

सीएफडी ट्रेडिंग किन एसेट्स या बाज़ारों पर होती है?

जब लोग पूछते हैं कि सीएफडी ट्रेडिंग क्या है, तो अक्सर वे यह भी जानना चाहते हैं कि यह किन बाज़ारों पर आधारित होती है। एक सीएफडी कई तरह के अंडरलाइंग एसेट्स की कीमत को ट्रैक कर सकता है। मोटे तौर पर इनकी कुछ बड़ी श्रेणियाँ ये हैं:

  • करेंसी पेयर (फॉरेक्स)
  • इंडेक्स, यानी किसी बाज़ार का समूह-सूचकांक
  • कमोडिटी, जैसे सोना, चांदी या कच्चा तेल
  • अलग-अलग कंपनियों के स्टॉक

इनमें से हर एसेट टाइप अपने आप में एक बड़ा विषय है, इसलिए यहाँ बस इतना जान लेना काफी है कि सीएफडी इन सभी बाज़ारों की कीमत पर आधारित हो सकता है। हर श्रेणी की गहराई में जाना इस परिभाषा-पेज का मकसद नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या सीएफडी ट्रेडिंग में असली एसेट खरीदना ज़रूरी है?

नहीं। सीएफडी का पूरा आधार ही यह है कि आप असल एसेट खरीदे बिना सिर्फ उसकी कीमत के अंतर पर सौदा करते हैं। मालिकाना हक कभी आपके पास नहीं आता।

सीएफडी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

फॉरेक्स का मतलब है करेंसी की खरीद-बिक्री। सीएफडी एक व्यापक ढाँचा है, जिसके तहत करेंसी पेयर के साथ-साथ इंडेक्स, कमोडिटी और स्टॉक जैसी कई चीज़ों की कीमत पर कॉन्ट्रैक्ट बनाया जा सकता है। यानी फॉरेक्स को एक सीएफडी के जरिए भी ट्रैक किया जा सकता है, पर सीएफडी सिर्फ फॉरेक्स तक सीमित नहीं है।

क्या सीएफडी पर डिविडेंड मिलता है?

चूँकि सीएफडी में असली शेयर आपके नाम नहीं होता, इसलिए आपको उसी रूप में डिविडेंड नहीं मिलता जैसे एक असली शेयरधारक को मिलता है। सीएफडी सिर्फ कीमत के अंतर से जुड़ा होता है।

सीएफडी की पोजीशन कब बंद होती है?

सीएफडी पोजीशन तब बंद होती है जब कॉन्ट्रैक्ट को बंद किया जाता है। उसी पल की कीमत को खुलने के समय की कीमत से तुलना करके अंतर का हिसाब लगाया जाता है, और यही सेटलमेंट तय करता है।

क्या सीएफडी ट्रेडिंग शुरुआती लोगों के लिए उपयुक्त है?

सीएफडी एक जटिल और ऊँचे जोखिम वाला उत्पाद माना जाता है, खासकर लीवरेज की वजह से। इसे ठीक से समझे बिना इसमें उतरना समझदारी नहीं है। यह लेख सिर्फ यह बताता है कि सीएफडी क्या है, न कि यह कि किसे इसमें उतरना चाहिए। कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी रिसर्च और किसी योग्य विशेषज्ञ की राय जरूरी है।

सीएफडी ट्रेडिंग में जोखिम ज़्यादा क्यों माना जाता है?

इसकी सबसे बड़ी वजह लीवरेज है। छोटी जमा राशि पर बड़ी पोजीशन खोलने का मतलब है कि नुकसान भी उसी अनुपात में तेजी से बढ़ सकता है। कीमत का थोड़ा सा उलटा रुख भी बड़ा असर डाल सकता है।

सीएफडी की फुल फॉर्म क्या है?

सीएफडी की फुल फॉर्म है कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (Contract for Difference), यानी अंतर का अनुबंध।

जोखिम चेतावनी

सीएफडी (CFD) जटिल वित्तीय साधन हैं और लीवरेज के कारण इनमें तेजी से पैसा खोने का उच्च जोखिम होता है। सीएफडी सभी निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। आपका नुकसान आपके ट्रेडिंग खाते में मौजूद फंड तक सीमित है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप इसमें शामिल जोखिमों को पूरी तरह समझते हैं और ट्रेडिंग करने से पहले सावधानीपूर्वक विचार करें कि क्या आप अपना पैसा खोने का उच्च जोखिम उठा सकते हैं।

सीएफडी आपके और प्रोवाइडर के बीच एक समझौता है। यह आपको अंडरलाइंग एसेट (मूल संपत्ति) पर कोई मालिकाना हक, कोई शेयरधारक अधिकार और डिविडेंड का कोई हक नहीं देता है, हालांकि ओपन पोजीशन पर डिविडेंड एडजस्टमेंट लागू किए जा सकते हैं। रात भर खुली रहने वाली पोजीशन पर सामान्यतः फाइनेंसिंग शुल्क लागू होते हैं।

यह निवेश सलाह नहीं है।

अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय, निवेश या ट्रेडिंग सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा अपनी खुद की रिसर्च करें और किसी योग्य वित्तीय पेशेवर से सलाह लें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के परिणामों की गारंटी नहीं है, और सभी निवेशों में जोखिम होता है, जिसमें मूल राशि के नुकसान की संभावना भी शामिल है।

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